जो लोग ये पुंछते हैं कि मोदी ने 5 साल में किया क्या है ?
मुझे 2009 का आम चुनाव याद है जब नेता मस्जिद मस्जिद , दरगाह दरगाह जाकर चादरें चढ़ाया करते थे और अपना वोट बैंक साधा करते थे , यहां तक कि फिल्म स्टार अपने फिल्म की रिलीज पर भी मुंह उठाकर दरगाह में चादर चढ़ाते थे। ये बातें मेरे मन को कचोटती थी, कि क्यों इतने मंदिरों के बावजूद कोई नेता मंदिर जाकर हिन्दू धर्म को अहमियत नहीं दे सकता ।
खैर 2014 का चुनाव हुआ और तस्वीर बदली । आज पांच साल हो गए और मजाल है किसी नेता की जो दरगाह में जाए । सब अब मंदिर जा रहे हैं , समाजवादी कुंभ नहा रहे हैं , राहुल बाबा अपना जनेऊ दिखा रहे हैं। आज मेरे मन को सन्तोष मिलता है कि आज बहुसंख्यक समाज को अपनी तरफ करने की कोशिश की का रही है।
उसने इस देश के हिन्दुओं में ये विश्वास जगाया है कि वो भी इस देश में वोट बैंक है , हिन्दुओं में स्वाभिमान जगाया है इस देश को अंतरराष्ट्रीय सम्मान वापस दिलाया है और स्वाभिमान सबसे बड़ी चीज है चाहे वो किसी भी मूल्य पर मिले
खैर 2014 का चुनाव हुआ और तस्वीर बदली । आज पांच साल हो गए और मजाल है किसी नेता की जो दरगाह में जाए । सब अब मंदिर जा रहे हैं , समाजवादी कुंभ नहा रहे हैं , राहुल बाबा अपना जनेऊ दिखा रहे हैं। आज मेरे मन को सन्तोष मिलता है कि आज बहुसंख्यक समाज को अपनी तरफ करने की कोशिश की का रही है।
जो लोग ये पुंछते हैं कि मोदी ने 5 साल में किया क्या है ?
उसने इस देश के हिन्दुओं में ये विश्वास जगाया है कि वो भी इस देश में वोट बैंक है , हिन्दुओं में स्वाभिमान जगाया है इस देश को अंतरराष्ट्रीय सम्मान वापस दिलाया है और स्वाभिमान सबसे बड़ी चीज है चाहे वो किसी भी मूल्य पर मिले
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