Posts

Showing posts from January, 2019

2019 का चुनाव

Image
2019 का चुनाव:  यदि पसंद आए तो आगे अवश्य भेजें।🚩🙏🚩      चर्चों   से   चिठ्ठी   निकल   पड़ी,      मस्जिद  का  फतवा  बोल  रहा।      यदि   मंदिर   अब  खामोश  रहे,      समझो  फिर  खतरा  डोल रहा।                                वो  देश  चलाएॅ फतवे से,                                तुम   तेल   सूंघते  रहना।                               जब घर में घुसकर मारेंगे,                               तब  हांथ  रगड़ते  रहना।      वो काल-खण्ड  हम या...

जय हिंद

Image
How's the जोश? High Sir. How's the जोश? High Sir. जय हिंद जय हिंद उरी .............. आप राईट विन्गर है या लेफ्ट विन्गर है भूल जाइए, आप हिन्दु है या मुस्लिम है या कोई और धर्म के भूल जाइए, अगर आप एक सच्चे हिन्दुस्तानी है तो उरी फिल्म जो की सर्जिकल स्ट्राइक पर बनी है, वह देखकर आपकी छाती गर्व से चौड़ी न हो जाएं और सर आसमान तक ऊँचा न हो जाएं तो समझ लेना आप हिन्दुस्तानी है ही नहीं! Must wach मूवी। #जय_हिन्द  

नवाबगंज,लहराते मोटरसाइकिल और एक गर्म प्लेट कुलचे

Image
यह लेख मेरे कुछ पुराने दोस्तों को समर्पित है नवाबगंज,लहराते मोटरसाइकिल और एक गर्म प्लेट कुलचे कुछ वर्ष पहले एक लंबी और मजेदार मोटरसाइकिल यात्रा के दौरान कुछ साथियों के साथ मैंने यात्रा की.... उस समय के दैनिक जीवन से खुद को मुक्त करके अचानक ही सफर पर निकल जाना कितना महत्वपूर्ण होता है यह सब तो हमारे पिछले दोस्त ही महसूस कर सकते हैं इसलिए जब भी मेरा मन और मेरी आत्मा शहर की जटिल ठोस गलियों में फंसा हुआ महसूस करता हूं तो मैं आधुनिक शहरी जीवन से दूर रहने के लिए तरसता हूं तो मैं सब कुछ छोड़ के बाहर निकल जाता हूं भले ही कुछ घंटों की एक छोटी सी यात्रा क्यों ना हो......... कुछ साल पहले जब ठंडी हवाएं लखनऊ के आकाश को घेर रही थी जब हवा में बारिश की नम प्रत्यक्ष थी और जब हवा एक हल्की आंधी में बदलने लगी थी जब मैं और मेरे दोस्त मोटरसाइकिल लेकर नवाबगंज पक्षी अभ्यारण के लिए (जो अब शहीद चंद्रशेखर आजाद पक्षी अभ्यारण कहलाता है) निकल गए ! मुझे और मेरे दोस्तों को उस ठंड में एक भी पक्षी देखने का कोई मौका नहीं मिला......पर चेहरे पर...

भाजपा

#न #बासी #बचे #न #कुत्ता #खाय भाजपा पढ़े-लिखे मूर्खों की पार्टी है । जब भी भाजपा की सरकार बनती है वह पाँच साल तक देश के खजाने को भरने में लगी रहती है । खजाना तो डबडबा जाता है पर सुविधाभोगी आम जनता परेशान हो जाती है । परेशानी की मानसिक दशा में वह कांग्रेस या विपक्षी गठबंधन को जिता देती है । फिर कांग्रेस भाजपा द्वारा अर्जित कोष का जमकर उपभोग करती है । कुछ मुफ्त के नाम पर जनता को परोसती है तो कुछ घटक-नारायण कर जाती है । इस तरह पाँच साल जनता भी खुश और पार्टी भी मदमस्त । खुशी के मारे पुनः पाँच साल के लिए कांग्रेस को चुनती है । पर तब तक खजाना डोल चुका होता है । पाँच साल में जनता इतनी त्रस्त हो जाती है कि फिर भाजपा को चुनती है और वह फिर देश का मुद्रा कोष भरने लगती है । वाजपेयी जी के समय से यही हो रहा है । देश के खाली पड़े खजाने को उन्होंने विदेशी प्रतिबन्धों (परमाणु विस्फोट के कारण) के बावजूद भरा । वित्तीय अनुशासन को सुविधाभोगी लोग सह न पाए और UPA को चुन लिया । UPA ने वाजपेयी जी के कमाए दौलत को उड़ाकर पाँच साल लोगों को मौज करवाया और पुनः सत्ता में आए । पर तब तक खजाना खाली हो चुका था ...