नवाबगंज,लहराते मोटरसाइकिल और एक गर्म प्लेट कुलचे
यह लेख मेरे कुछ पुराने दोस्तों को समर्पित है
नवाबगंज,लहराते मोटरसाइकिल और एक गर्म प्लेट कुलचे
कुछ वर्ष पहले एक लंबी और मजेदार मोटरसाइकिल यात्रा के दौरान कुछ साथियों के साथ मैंने यात्रा की.... उस समय के दैनिक जीवन से खुद को मुक्त करके अचानक ही सफर पर निकल जाना कितना महत्वपूर्ण होता है यह सब तो हमारे पिछले दोस्त ही महसूस कर सकते हैं इसलिए जब भी मेरा मन और मेरी आत्मा शहर की जटिल ठोस गलियों में फंसा हुआ महसूस करता हूं तो मैं आधुनिक शहरी जीवन से दूर रहने के लिए तरसता हूं तो मैं सब कुछ छोड़ के बाहर निकल जाता हूं भले ही कुछ घंटों की एक छोटी सी यात्रा क्यों ना हो.........
कुछ साल पहले जब ठंडी हवाएं लखनऊ के आकाश को घेर रही थी जब हवा में बारिश की नम प्रत्यक्ष थी और जब हवा एक हल्की आंधी में बदलने लगी थी जब मैं और मेरे दोस्त मोटरसाइकिल लेकर नवाबगंज पक्षी अभ्यारण के लिए (जो अब शहीद चंद्रशेखर आजाद पक्षी अभ्यारण कहलाता है) निकल गए !
मुझे और मेरे दोस्तों को उस ठंड में एक भी पक्षी देखने का कोई मौका नहीं मिला......पर चेहरे पर हवा और बारिश की बूंदों को महसूस करना विशाल हरे मैदानों और 45 एकड़ की झील में लहराते कमल के फूलों को देखना मेरे और मेरे दोस्तों के लिए यहां आने का अच्छा बड़ा कारण था जब तक मैं और मेरे दोस्त लखनऊ मेट्रो की साइट को पार करके चिकने राजमार्ग पर लगभग 1 घंटे की यात्रा करके अभ्यारण के फाटक पर पहुंचे तो ठंड हवाओं के बीच एक हल्की सी धूप की किरण निकल आई थी !हम सब ने टिकट लेकर विशाल झील को छोड़ते हुए हाल ही में बने ट्रैक पर निकल गए हर जगह जहां सब कुछ स्थित शांत एवं हरा भरा था !झील की मुख्य रूप से अदृश्य पर कमल के फूल हवा में कोमलता से लहरा रहे थे और हल्की धूप में मेरे सभी साथी मन ही मन खुशी और एकांत का आनंद ले रहे थे...
लौटते समय मैंने खुद से वादा किया कि मैं प्रकृति की ओर बार-बार लौटूंगा सड़क पर निकल जाने से किसी छोटे से छोटे अफसर को को भी हाथ से जाने नहीं दूंगा ! ''मुझसे खुद से यह वादा के काफी समय बीत चुका है''





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