पॉल्यूशन
पॉल्यूशन जैसे गंभीर मुद्दे पर भी सारी पार्टियां फुटबॉल खेल रही हैं..जनता अपने अपने खेमों को डिफेंड कर रही है.
डाटा दिखा रहा है कि पंजाब पराली जलाने में 90% तक योगदान दे रहा है लेकिन हरियाणा जहां के किसानों ने बहुत संयम दिखाया है वो भी पंजाब के ही भाव गाली खा रहे हैं.
दिल्ली का अपना प्रदूषण जिन कारणों से है उन पर कोई एक्शन प्लान नहीं है और जो योजनाएं थीं भी उनसे केजरीवाल-केंद्र पोशम्पा भाई पोशम्पा खेल रहे हैं..जनता भागती फिर रही है...कभी कभी ताली भी बजा देती है...समझ में किसी की भी नहीं आ रहा कि चल क्या रहा है..
टीवी पर प्रदूषण की डिबेट में भी विशेषज्ञ गायब हैं और राजनतिज्ञ जूतम पैजार मचा रहे हैं. बहरहाल अखबारों और विज्ञापनों में हर सरकार अपनी अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही है और पार्टियां किसानो के खिलाफ नौकरी पेशा वर्ग को और नौकरी पेशा वर्ग के खिलाफ किसानों को भड़का के अपनी अपनी जिम्मेदारियों से निकलने का बैक अप प्लान बना चुकी हैं.
ट्रोलगिरी छोड़ के रिपोर्टर बनने की ओर अग्रसर करने पर हम इन पार्टियों को कभी माफ़ नहीं कर पाएंगे.
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